"हौं चरणनिं कौ चेरौ"
"हौं चरणनिं कौ चेरौ"
-1-
झीनी सारि झीनी तंग अंगिया
पहिर पिय प्यारि चलै चाल मतवारि
जानि प्रियतम सिंगार धरयो जु प्रिया मन हरयौ
निकरै दोऊ घर आंगनि सों छुपि छुपि चल्यौ
आँख बचायकै पायल नूपुर दबाय कै वन विहरयौ
कारि अंधियारि रतिया डर लागै पर रोकै ना रूकयौ
पिय मिलन कों आस भलि चल दी कछु न लख्यौ !
-2-
संग चलैं जु सखियाँ इक पग धावै दूजी धरावै
इक बनी चंद इक चकोरी इक दिखावै राह दूजी बुहारै
चलै आगै और पाछै बिच बिच चलै ललित रस किसोरी
ज्यूं बाढ़ै त्यूं त्यूं तमाल कदम दल झुकि आवै पथ सुहावै
कण कण होय पुष्प जित पग धरै मकरंद रस पराग झरावै
कुंजन निकुंजन सेज सजि श्रम पर पी मिलन तें ना होवै
चलि अलबेलि चाल सखिन संग श्वास धरै चहूं दिसि महकावै !
-3-
पग धरै पिय प्यारि कुंजनि महक गयो सारि
नख सों सिख तांई होय कंप अतिहि भारि
अजहू पिया बिराजै तहाँ फूलन सेज बिछाए न्यारि
बैठि धरा कू सजाए रहै इक इक लरि पौवति लटकारि
अहा!कुसुम बेलि लता पुष्प अजहू भागि जग्यौ
प्रियतम निरख रहै बाट कर बुहारि पलकन तैं धरूं पियप्यारि !
-4-
देख अद्भुत सिंगार निकुंज कौं सखियाँ जाय बलिहारि
सांचि भयो कितनो प्रेम हिय भरयो कैसे जोत रहै राह बनवारि
चाल चलन भूलि डगमग डगमग इक पग रखै जावै न सम्भारि
रोम रोम कम्प अति बाढ़यो हाय! पिया नै आए गोद ली प्यारि
चलै सेजरिया तैं लगै ज्यूं पिय हिय तें पग रख दियो सुकुमारि
लालि गुलाबी सरम तें भई अखियाँ न मिलाबै नेह रस सों पिय पदकमल पखारै !
क्रमशः
-5-
राजकुंवरि संग सखि सलेहि
बिराजै मनमोहन सुंदर सेजि जित सजेलि
मुग्ध प्रिया अति सुख मानै करकमलनि सुखमेलि
हेरि ज्यूं कुंजन कौ रूप छटा न्यारि सखिन चौंकि री
इत फूलेल झालर तनि उत प्रांगण फुलन कौ कलशघेरि
प्यारे पिया स्याम सखिन संग मंगल सेज ब्याहनि कौ सजि !
-6-
कियो इसारौ सखिन नै देखि किसोरि दंग भई
कछु भेद ना भेदन कौ आवै स्याम सखिन आए धरई
लै के धाई स्यामा जु कौ सुंदर सलोनि दुल्हनि भेस सजि
लाल सुभग सारि सुघर लाल कंचुकि तै लालो लाल चुनरि दीनि
पियप्यारि कौ लालहि चूड़लौ लाल लालि सौं लाल चंद्रिका धरैनि
लाल गलमाल लाल ललाट चूड़ोमणि लालहि लाल कराम्बुज दीनि
लाल नखबेसर लाल कर्णकुंडल लालहि कटि करधनिजालि सजै री
लाल पदाम्बुज पायल नूपुर लालहि जावक महाबर कीनि
अति रंग गहरो लाल कौ लालि लालो लाल मुख प्रेमछबि री !
-7-
मंगल भयो अजहु कुंज निकुंजनि
सखि सहचरि संग मिलि मिलि उमंग्यो मंगल गाननि गावैं
जित पग राखै लाड़लि लालहूं लाल पुष्पन लाल मुख पावै
निकुंज भवन दूजौ सज्यौ जित गौरांगि सखी स्याम कौ सिंगार धरावै
सिरपेच मोरन की कलगी चमकै नीलांम्बर पगड़ी सेहरौ दमकावै
ललाट लाल बेंदि भुजाबंद कुण्डल गलमाल लाल पहरावै
कटि कटैलि कमरबंध लाल सौं लाल नखमणि सजावै
नीलमणिन सौं लाल मुखनि तैं अलकनि नाचत झलकावै
नीलि काछनि तैं नीलो चौलो लालहू लाल अंगुरिन मणि सुहावै
इक कर दीनि लालहूं लकुटिया दूजै कर परि वंसी आपहि सरमावै
आजहू दुल्हो बन्यौ स्याम स्यामा गौरि संग प्रीत लालहि फेरौ पावै !
-8-
दोऊन पिय प्यारि प्यारि कौ पिय
लाई सम्मुख सखि संगिनी मिलि महतारि
द्वार निकुंज कै थाड़ै इत प्रियतम उत प्रिया अरूणारि
सखिन मिलि गायन मंगल करै नाचै मयूर हंस शुक सारि
हाय !देखि छबि प्रिया मुखहूं प्रियतम सबरै होस उड़ै री
धर अधरन ज्यूं बंसी सौं पुकारै राधिका नयनहिं मिलै री
देखि पिय सुखमाननि रससंग्रामिनि नै जादू करि डारि
लाल गुलाल कपोल अधर भयै अखियाँ काजर मेघ समाननि
अंजन बन समाए गयो री भूलै संग सखियाँ मखौलि उड़ाबहिं
अंग अंगहूं कौ रंग रंग्यौ रोम रोम अधर कंपित हिय रस ढुरकि जाहिं !
क्रमशः
"हौं चरणनिं कौ चेरौ"
-9-
अखियाँ मिलि यों दोऊ ते चार भई
निरखै एकहू छबि ज्यूं आरस निहारै खुद ही
कटाक्ष नयनन को हिय बसै हेरि हेरि निहाल पई
सखिन सहचरि त्यूं प्रतिबिम्ब पियप्यारि कों
एकहू प्रीति सुखनिहू अनुराई अंनत देहन रस एकहू चई !
-10-
पिय बसै प्यारि जु ते प्यारि पिय सुखभामिनि
नागर नागरि करैं चित्तचोरि सखी सगरी पधारनि
कर पकर स्याम को पुस्प बेदि माहिं लाई
कर आग्रह पिय प्यारि संग संग बैठाई
चूनर लाल लालि कों लाल पीताम्बर सों बंधाई
मंगल गायन मिलन सुखायन फेरो झटपट दियो कराई
पिय निहारै प्यारि मुख कमल सेहरन सुंदर देख प्यारि मुस्काई !
-11-
चार सुचारू पद गाई सखि आलि
चार स्यामा गौरि सखिन दियो गाई
सुनि सुनि प्यारि सखिन युगल जोरि सुख पाई
बिराज दियो दोऊ जुगल बर झूलन सेज सजाई
इक इक सखी इक इक मञ्जरी बलि बलि जाई
कोऊ देत प्रेम को उपहार कोऊ लेत बलाईं
चिरजीबो सुहाग लाल लाड़लि रहो इकरस नेह ढुराई !
-12-
अद्भुत सिंगार पवाए कै रस हिंडोरा सजाए कै
नृत करै कोऊ गायन कोऊ सुख देत बींजन कों
कोऊ महक भरि ताम्बूल लाई कोऊ देत मुख तें मिस्ठान
कोऊ फूल अगरू इत्र दे बरसाई कोऊ रस लाई फलन कों
रस रंग रंगै दोऊ जन कोर पहला स्यामा जु मुख दई
अधरामृत उच्छिष्ट प्रसादि मुख प्यारो आपणै धराई !
क्रमशः
"हौं चरणनिं को चेरौ"
-13-
कुंज बिहारणि निकुंज बिहारिणी
पधारै दोऊ निभृत देस जित सखी री
सहचरिनि सुघर मिलि बनाई फूलन सेजरि
हेरि थकै रहै अघझगै अतहू प्यारि रस महकाई
इक इक लतन फूलन में हाय !पिय अद्भुत छवि बनाई
हर इक लतन पतन ते अहा !प्रिया अद्भुत नांव लिखाई
कर पकर स्यामा सखिन कियो सम्मुख
सखि देख मोहन मुस्काई
धन्य किसोरि जु ज्ह रस बधु तैने प्रेम दुल्हो बर पाई !
-14-
रस रंगिनि पिय संगिनि देख पिय सेज सजरिया
सेहरो दियो तनिक हटाई मुख लाल लालन को देख प्यारि सरमाई
अद्भुत रस सिंगार धरयो जुगल अद्भुत सुघर प्रेम सेज सजाई
प्रेम को खिलौना दोऊ कियो अजहू नवरस प्रेम सगाई
नयन मिलै अनमिलै रहै कर पकर प्यारि जु सुख पहुँचाई !
-15-
इत उत निहारै सखियाँ मोहन अजहू मोहिनी चलाई
रंगि रहै पिय सुखदानिनि अजहू लियो दियो बलाईं
देख छटा रस रंग नेह को सखी इक फूलमालि लै आई
धराओ इक पिय जु प्यारि इक प्यारि पिय जु दियो धराई
अब चंचल चपल पिय हिय सूझि एकहू चतुराई !
-16-
कर दोऊन को माला धराई
पिय मुख लियो तनिक अकड़ाई
आजहू प्यारि पग ते पग धरो जु तब माल जाए पहराई
सखिन देख प्रिया मुख गुलाबी सरम ते आंखिन सों बतियाई
नयननि प्राणप्रानिणि जु रखि नैनहू हाय पिय गयो ठगाई
चतुर सिरोमनि चतुर नागरि सों काहै करै चतुराई
मिलाए कै नैन चित्तचोरनि चोरन सों गलमालिनि दियो पहराई !
क्रमशः
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