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चलो लौट जाओ मोहना तृषित

चलो लौट जाओ मोहना , किसने तुम्हें रोका भी

हमने तो मिलन में न टोका था कभी

बस बता भी दो अब कौन स्वीकारेगा जिन्हें छूते तुम हो

अब कहाँ फिर मिलेगी प्रवाहिनी कलिंद समीरनि सी

तुम जब मिलकर नहीँ मिलते तब ऐसा कौन जो सम्भाले

विकल्प नहीँ तुम्हारा कोई पलक कहीँ तब उठती ही नहीँ

हे सलोने साँवर साकार प्रिय प्राणेश मेरे

तुम बना ही गए निराकार निर्विकल्प निरीह नीलाकाश हमें

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