पिया देस भावन लाग्यो
स्वदेश वहीँ अब जानो
या जगत् मेरो पीहर भयो
पी को हिय ही मेरो बसेरो
कब उठेगी यहाँ डोली , पिया
कब जाऊँगी छोड़ बाबुल गलियाँ
अबकी बारी पी संग रम ज्यूँ
न आऊँगी इस नगरिया
जहाँ पिय बसे वहीँ मेरो कलेजो
प्रीत सगाई कर गए कब लेगे फेरो
ओढ़नी श्यामली न ओढाते तो सहज होतो बसेरो
अब तो पिव पिव साँस पुकारे
दिन छिन मिलन रतिया ही जागें
पिय तुम दिखे हो जबसे न भावे सगे अपने
पिय ही सब बसे अब , अब सब ही पिय ही निरखुँ
यूँ निरखुँ तो पायल संग बतिया लूँ ,
सखियां हँसे है , सगे सब रूठे ,
पिय तव देस जड़ कर दिजो
और देस बसे चेतूं ऐसो काहे कीजो
कब उठेगी डोली , कब होय ब्याह मेरो
पिया देस ही भावन लाग्यो
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