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तुमसों बात न कोई गोई

तुमसों बात न कोई गोई।
जैसो भी हों नाथ तिहारो-यही एक बल मोई।
साधन-आराधन न भयो कछु,विषयन में वय खोई।
फँस्यो रह्यौ जग के जंजालन,जग-चिन्ता सिर ढोई।
स्वारथ ही मान्यौ परमारथ,रचि-पचि साध्यौ सोई।
तदपि न सो हूँ सध्यौ स्याम कछु,व्यर्थ हि वयस विगोई।
अब कछु चेत भयो मनमोहन तुव करुना कछु जोई।
चरन-सरन करि वरन प्रानधन पर्यौ पौरि सब खोई।
खोय सभी जो मिलहु स्याम तुम तो सब विधि सुख होई।
तुम मेरे जीवन के जीवन,चहौं न मैं सुख कोई।
कहा करों का कहों न जानों,मानों सरबस तोई।
तुव करुना ही है बल मेरो,होनी होय सो होई।

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