चुरायो बरजोरी चित मोर।
ऐसो ढीठ देत फिर नाहीं,सुनत न नैंकु निहोर।
लेत चित्त फिर पास न झाँकत,विनती सुनत न मोर।
तरसि-तरसि मैं मरहुँ विरह में,तरस न करत कठोर।
परी फेर में वाके सजनी वह लंगर-सिरमौर।
आग लगाय तमासो देखे,तकै न वाकी ओर।
कापै जाय पुकार करों अब,अपनो दिखत न और।
जैसा है अपनो है वह ही, वा लगि मेरी दौर।
आ चितचोर चोर मोहँकों,क्यों तरसावै और।
मैं तेरी ह्वै रहों सदाकों,रहै न दूजी ठौर।
तेरी तो मैं सदा-सदा हों,काहे न लेत अँकोर।
मैं न रहूँ बस रहे एक तू-यही लालसा मोर।
॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...
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