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कान्हा तोहे अति प्यारा बनाउ

कान्हा तोहे अति प्यारा बनाउ !
                  लाला तोहे अति प्यारा बनाउ !2!
तोहे सुबह लोरी गा उठा करके !
                  कछु तोहसे मैं बात बतियाउ !!
तोहे तन केसर स्नान करा करके !
                   बदन को  मैं  पोछ  सुखाऊ !!
तेरे अलकें कंघी सवार करके !
                   भाल  टिका  काला  लगाऊ !!
तोहे बस्त्र नए नित सजा करके !
                   गल फूल बन माल पहनाऊँ !!
सीस मुकुट मोर पिच्छ लगा करके !
                   कुण्डल नथ बेसर चमकाऊँ !!
कर बंसी  मिर्दु  मधुर धरा करके  !
                   तोहे निज उर आसान बैठाऊँ !!
तेरे साज सृंगार सब भाँति करके !
                    तोहे  दर्पण लाय  दिखलाऊँ !!
तोहे मृदु मुस्कान इशारा देखि के !
                     मन को अति शांति समझाऊँ !!
तेरे सृंगार  साज  करा  कर  के !
                      तोहे  माखन भोग  लगाऊ !!
माखन हाथो से खिला कर के !
                      तेरे मुँह पोछ हाथ धुआऊँ !!
नित सेवा "बिरहनी" कर करके !
                       ऐसे जीबन अपनी बिताऊँ !!
कान्हा तोहे अति प्यारा बनाउ !
                  लाला तोहे अति प्यारा बनाउ !2!

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