रैन जागी पिया संग रंग मीनी।
प्रफुल्लित मुख कंज नेन खजरीटमान मेन मिथुरी।
रहे चुरन कच बदन ओप किनी।
आतुर आलस जंभात पूलकीत अतिपान खाद मद।
माते तन मुधीन रही सीथल भई बेनी।
मांगते टरी मुक्तता हल अलक संग अरुची रही ऊरग।
नसत फनी मानो कुंचकी तजी दिनी।
बिकसत ज्यौं चंपकली भोर भये भवन चली लटपटात।
प्रेम घटी गजगती गती लिन्हा
आरतीको करत नाश गिरिधर सुठी सुखकी रासी सूरदास स्वामीनी गुन गने न जात चिन्ही।
॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...
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