पिय नगरिया जाय डोलू , बस मोहे पानौ हौ बृंदाबन !
पिय मिली बिरह मिटाऊँ ,उर पीर सुनानौ हौ बृंदाबन !
पिय बृंदा बिपिन महँ मोहे , पिय ढुंढ़नौ हौ बृंदाबन !
टेरत हेरत हारी बिथिन महँ , अहि खोनौ हौ बृंदाबन !
कहीँ आय पिय बाँहि पकड़ी , ले चलनौ हौ बृंदाबन !
"बिरहनी" कान्हा सौ बिनती करै , बसालौ हौ बृंदाबन !
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