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ऐ जी मै तो दरसन को प्यासी। आँचल सखी जु

ऐ जी मै तो दरसन को प्यासी।
हसूँ ,रोवू पिय बुलावू
कबहु पपिहरा चुप करावू
पपिहा करत मौरी हाँसी।
ऐ जी मै तो......
टेरत टेरत हार गयौ मै
रोवत रोवत मौन भयौ मै
आयौ न मौरा ब्रजवासी
ऐ जी मै तो .....
देश कौन सो जाय बसौ पिय
प्रीत देय काहै छोडि गयौ पिय
बनाय राखो वा ही देसवासी
ऐ जी मै तो.....
देखू उठ उठ द्वार बार मै
कहू पिय से हार हार मै
बना लेयो चरणन को दासी
ऐ जी मे तो....

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