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अनमनी सी नाही मानै राधिके , आँचल सखी जु

अनमनी सी नाही मानै राधिके।
सखियन मिल सबै घेर लयी,श्यामसुन्दरआवै निकट नाही।
सुनत नाही बैन पिय के,अकुलावत अतिहि हिय सो राही।
बिनती करै दुई कर जौरे,मान तजौ लली वृषभानु दुलारी।
मानै न एकौ बात सुनै न,बंशी चरणन प्यारी धराही।
दास जान निज करूणा करिहौ,मोहन देवत प्रेम दुहाई।
प्रितीबश अकुलात न देखिहौ,झट हिय सो दुलारी लगाई।

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