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मेरे जीवन-धन प्यारे! मैं कबसे तुम्हें बुलाऊ

मेरे जीवन-धन प्यारे! मैं कबसे तुम्हें बुलाऊँ।
आओ नैनों के तारे! मैं चरण कमल सहलाऊँ।।
यसुमती मैया के दुलारे! मैं माखन तुम्हें खिलाऊँ।
ब्रज पति के परम दुलारे! मैं सुललित लाड़ लड़ाऊँ।
आओ नैनों......

हे सखा-प्राण-आधारे! मैं मनहर खेल खिलाऊँ।
ब्रज-युवतिन प्राण-पियारे! मैं हिय-रस तुम्हें पिलाऊँ।
आओ.....

राधा-आराधनवारे! मैं सरबस चरण चढ़ाऊँ।
अर्पित कर तन-मन सारे! मैं तुम पर बलि-बलि जाऊँ।
आओ.....

तुम रहो प्रेम-मतवारे! मैं प्रेम-सुधा ढलकाऊँ।
तुम रहो न मुझसे न्यारे! मैं हिय में आन समाऊँ।
आओ.....
अनुपम सुषमा-श्री धारे, मोहन! मैं तुम्हें रिझाऊँ।
हिय की सब जाननहारे! तुमसे मैं कहा छुपाऊँ।।
आओ.......
😭😭☺☺☺☺😭😭😭☺☺☺😭👏

Comments

  1. कृपया लेखक का श्रेय देवे। यह पद पुस्तक पद रत्नाकर से है जो परम पूज्य श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने प्यारे को समर्पित किया है। श्री हरि 🪷

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