Skip to main content

श्री पदकंज सेवा

श्री पदकंज सेवा

पंकज सुमन प्रिय छब निरख हिय हरषत

प्रेम मिलन नित श्रीप्रिया संग पी निरत रहत

ललित सेवत कंज पद माधुरी सु रस सुहत

मधुर मुदित अरबिन्द युगल अधरन खिलत

सिहर रही स्यामा श्याम-प्रेम-आलिंगन पावत

नैन झपक रसीली सुकुमार सेवा रसमाधुरी करत

मोहन जानि पंकज अतिसुकुमुल स्नेह सहलाय छुवत

रसराज छबीलीपद चाकरी सुविनय सखियन सु मांगत

ललित संग सखियन मुग्ध भई युगलप्रेम-भावरस पिबत

प्रिया मगन भई पग छुवत तरंग-स्पंद भंग काहे करत

युगल नयन द्वय कल्लोलिनी कालिन्दी कपोल रस पीवे बहत

भुवनपति पुनि-पुनि करबद्ध प्रेमाकुल किशोरी सु अरदास करत

मकरंद लाल पग दरस नैनन पुनि पुनि कालिन्दी झरत

ललित युगल प्रीत पावत वृंद-किंकर अनुपम प्रमुदित हरषत

रसिक शिरोमणी थिर-थिर चरणमय जलज कर सु छुवत

ललित परस भंद होय अरविन्द सु अरविन्द मिलत

श्री तरंग आह्लाद भीतर रोम-रोम पूरण भये नाचत

देवादिक दुर्लभ प्रीत दरस पावत ललित नैन बरसत

संग पाय कछु-कछु नैन प्रिया मुंदी मुंदी झरत

पद सेवा पाय हरषे पुलक-पुलक अधर महकत

तनिक झिझक किशोरी तनिक हरष तनिक रोवत

काहे सलोने रस रसिकेश्वर रसराज चरण छुवत

प्रियतम सुख पाय जाही विधि सु प्रिय लागत

श्याम तव सुख काज धरम इक राधिका धरत

इक होत ,दुई होत ,दुई होत स्यामस्यामा पुनि इकहिं होवत

"तृषित" मलिन ,  युगल-दरस याचना पल-विपल रोवे-रोय करत 
सत्यजीत "तृषित"

Comments

Popular posts from this blog

युगल स्तुति

॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...

वृन्दावन शत लीला , धुवदास जु

श्री ध्रुवदास जी कृत बयालीस लीला से उद्घृत श्री वृन्दावन सत लीला प्रथम नाम श्री हरिवंश हित, रत रसना दिन रैन। प्रीति रीति तब पाइये ,अरु श्री वृन्दावन ऐन।।1।। चरण शरण श्री हर...

कहा करुँ बैकुंठ जाय ।

।।श्रीराधे।। कहाँ करूँ वैकुण्ठ जाए.... जहाँ नहीं नंद, जहाँ नहीं यशोदा, जहाँ न गोपी ग्वालन गायें... कहाँ करूँ वैकुण्ठ जाए.... जहाँ नहीं जल जमुना को निर्मल, और नहीं कदम्ब की छाय.... कहाँ ...