लो फिर आज वक़्त ने पहली चाल चली
इस ओर हम उस तरफ वक़्त के संग
ज़िन्दग़ी शतरंज की तरह बिछी
कल ही तो पिछली बाज़ी वक़्त ने जीती थी
अपनी एक ओर हार के ज़श्न को बख़ूबी लूटा हमने
आज फिर एक नई बाज़ी
हर दफ़ा जीतकर पहली चाल चलना
अब वक़्त की आदतन हो चली
यहाँ बाज़ी तो पियादे के एक क़दम पर थमी
बख़ूबी ज़िन्दगियों के शतरंज
वक़्त की बाज़ी से कभी जीते भी तो सही
कल की बाज़ी में जो हम थे अब वो नहीँ
फिर एक बार मोहरें सजी है
जीत वक़्त की भली
पर चालें यहाँ भी कम ना चली
वक़्त तूने एक गज़ब का ख्याल सीखा दिया
हार कर ज़श्न में जीना बता दिया
तेरी कल की जीत तुझे फिर सामने बराबर करती है
यूँ हार कर भी ज़िन्दग़ी हुज़ुरों के इम्तहान लेती है
॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...
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