Skip to main content

नैनन ही नैन कहै बैन प्यारे प्यारीजु,

नैनन ही नैन कहै बैन प्यारे प्यारीजु,हसी खुशी मान दुई नैना ही जतावै है।
खिलावै झरोखै खड्यौ लाडली शुक हू,चपल मोहन खौल झरोखा उडावै है।
नैनन तरेर तीखै कछु लली दैखिहै,लाल नैन नैन हु बिनय सुनावै है।
करत हु मान अनमनी भयी राधिकै,नैन फिरायै कछु मुख हु घुमावै है।
रसीलै अधर रस भरै दु कपोलन पै,लाल धरै लली कौ मान छुडावै है।
प्यारी रस लीला दुई रसिकबर दैखिहै,नैनन ही नैनन खिलौनै बतियावै है।

Comments

Popular posts from this blog

युगल स्तुति

॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...

वृन्दावन शत लीला , धुवदास जु

श्री ध्रुवदास जी कृत बयालीस लीला से उद्घृत श्री वृन्दावन सत लीला प्रथम नाम श्री हरिवंश हित, रत रसना दिन रैन। प्रीति रीति तब पाइये ,अरु श्री वृन्दावन ऐन।।1।। चरण शरण श्री हर...

संत ज्ञानेश्वर संक्षिप्त जीवन परिचय ------भाग १

संत ज्ञानेश्वर संक्षिप्त जीवन परिचय ------भाग १ पूना शहर से १५ मील दूर इंद्रायणी नदी के किनारे आलंदी नमक गाँव है. जहाँ सिद्धेश्वर मंदिर है. जिसमें नित्य श्रद्धालु भक्त नदी में ...