Skip to main content

ऐसी कृपा करो श्री राधे सदा मैं ब्रज में बसा करूं।

ऐसी कृपा करो श्री राधे सदा मैं ब्रज में
बसा करूं।
चुन चुन के श्रंगार बनाऊं तुलसी पत्र की
माल बनाऊं,
यमुना जल पखार के नित मैं कुंजन बसा करूं।
सब भक्तन को शीश नवाऊं ब्रजवासिन की
जूठन खाऊं,
प्रिया प्रीतम के यश को गाऊं यही मन
चाहा करूं।
नंदगांव बरसाने जाऊं भानु खर में मल-मल न्हाऊं,
गहवर वन और खोर सांकरी रज तन लसा करूं।
गोवर्धन परिकरमा लगाऊं मानसी गंगा गोता लगाऊं,
स्वर्ग लोक वैकुंठ न जाऊं चरणों में बसा करूं।
श्यामा-श्याम के चरण मनाऊं सखियों को नित शीश
नवाऊं,
'कृष्णानंद' भक्ति वर पाऊं युगल छवि लखा करूं।
ऐसी कृपा करो श्री राधे सदा मैं ब्रज में
वास पाऊं।

Comments

Popular posts from this blog

युगल स्तुति

॥ युगल स्तुति ॥ जय राधे जय राधे राधे, जय राधे जय श्री राधे। जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा, जय कृष्णा जय श्री कृष्णा॥ श्यामा गौरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसिलौ ...

वृन्दावन शत लीला , धुवदास जु

श्री ध्रुवदास जी कृत बयालीस लीला से उद्घृत श्री वृन्दावन सत लीला प्रथम नाम श्री हरिवंश हित, रत रसना दिन रैन। प्रीति रीति तब पाइये ,अरु श्री वृन्दावन ऐन।।1।। चरण शरण श्री हर...

संत ज्ञानेश्वर संक्षिप्त जीवन परिचय ------भाग १

संत ज्ञानेश्वर संक्षिप्त जीवन परिचय ------भाग १ पूना शहर से १५ मील दूर इंद्रायणी नदी के किनारे आलंदी नमक गाँव है. जहाँ सिद्धेश्वर मंदिर है. जिसमें नित्य श्रद्धालु भक्त नदी में ...