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र से रस , 29 , संगिनी जु

!! प्रणय रोष मनुहार !! श्री वृंदावन कुंज निकुंजों में प्रेम से पगी रस लीलाएँ जीवंत आज भी होतीं जब वे युगल रसिक हृदत्लों पर सखियों व श्रीकृष्ण और श्रीकृष्ण व श्रीराधे जु की प्र...

र से रस , 27 , संगिनी जु

!! प्रेम माधुर्य रति रस !! अनुपम मधुर महक प्रेम की और अद्भुत सुंदर झन्कार मधुर रस की।गहन निष्काम प्रेम प्रियालाल जु का और प्रियालाल जु के प्रति प्यारी सखियों का।जहाँ एक तरफ म...

र से रस , 28 , संगिनी जु

!! प्रेम रस रंग होरि !! होली का उत्सव और ब्रज धराधाम एक अटूट गहरा एहसास इसमें जो फाल्गुन मास से पूर्व ही रसिक हृदय मंदिर में होली के प्रेम भरे रंगों की महक व झन्कार बन नाच उठता है...

र से रस , 26 , संगिनी जु

!! राग अनुराग नवरस !! नित्य नव वृंदावन नित्य नवीन प्रवीण सखीमन नित्य नव नव श्री युगल मिलन।यही तो है वृंदावन धाम का नव नित्य प्रगाढ़ प्रेम रस जहाँ राग अनुराग की सजल धारा अनवरत ब...

र से रस , 25 , संगिनी जु

!! रस स्पर्श तरंगें !! गहन अनछुई सी पवन रूप बहतीं भाव तरंगें दो प्रेमी हृदयों में अनवरत जो सवरूपतः एक हैं और स्वभावतः अभिन्न होकर भी द्वितनु।दो मन पर एकरस सदा गहरे इतने कि देह क...

र से रस , 24 , संगिनी जु

!! अप्रतिम सुखसार प्रतीक्षा !! क्या हुआ जो नहीं मिले पर सदा मिले तो हैं ना।देहाध्यास भूल प्राण तन से छूटकर जब आत्मा परमात्मा का मानसिक मिलन हो चुका तो देह के कहीं भी होने से कहा...

र से रस , 23 , संगिनी जु

!! अप्रतिम सुखसार प्रतीक्षा !! क्या हुआ जो नहीं मिले पर सदा मिले तो हैं ना।देहाध्यास भूल प्राण तन से छूटकर जब आत्मा परमात्मा का मानसिक मिलन हो चुका तो देह के कहीं भी होने से कहा...