राधा जी के भाव वो जो हैं, जहाँ हैं, जैसे हैं, मेरे हैं। मैं जो हूँ, जहाँ हूँ, जैसी हूँ, उनकी हूँ। यदि वे आराधक हैं, तो मैं राधा हूँ। वे निशा हैं, तो मैं कालिमा हूँ। वे श्याम हैं, तो मैं ...
राधे राधे 🌾🌹आज की "ब्रज रस धारा"🌹🌾 दिनांक 23/12/2015 1. -आनंद कन्द श्री कृष्ण से त्रिभुवन को आनंद प्राप्त होता है परन्तु श्री कृष्ण को आन्दित करती है श्री राधा जी.2. -श्रीकृष्ण का माधुर्...
शरणागति । यहाँ क्या चाहिए , कैसी स्थिति चाहिए ? सच में तो यहाँ कुछ प्रयास नहीँ । यहाँ अपनी प्यास और सच्ची असमर्थता चाहिए । जो उनसे होगा , वो हमसे नहीं । अपने दर पर किसी को यूँ आये ...
अधीश्वरी है कुँजन की स्वामिनी वहीँ निकुँजन की सेज सजाती नित नव मनहर की लता-पता से बहे रसधारा वल्लरी बन त्रिभुवन सजाती मोहन रहे ना कुँजन बिन रसीली सब भुवन को निकुँज सी सजात...
तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी यही मौत है और यहीं ज़िन्दगानी कामधेनु रो एक ही दु:ख बृज री होती नन्दनंदन दरस पाय रही होती लाली दुहन रही होती ... काहे कामधेेनु रो सुख सुख बृज गईया...
सत्यजीत: साहिब !! तुम फिर आ गये ! जी हुज़ुर ... तुम अज़ीब हो ! यहाँ कायनात ना जाने क्या क्या ले कर मुझतक आती है ! और तुम ... केवल सवाल ... वो भी किसी ओर के ! सवाल भी अपने नहीं तुम्हारे पास ... और इन स...
:श्री प्रियाजु सरकार की जय जय !! *** *** *** *** गोपी - सखी के भोग और त्याग दोनों में भग्वत्प्रेम भरा है | बांई साँ जी (मीरा जी) ने कहा --- कहो तो मोतियन माँग ...