किशोरी जी को पाना है तो दास नहीं दासी बनना पड़ेगा.. ....पूर्ण समर्पण दासी भाव, किंकरी भाव, मंजरी भाव से ही आएगा ....बड़ी विडंबना है..भक्त भी बनना चाहते हैं.... .और शरीर का अहम् भी नहीं जाता.. ....
वृन्दावन का माधुर्य -- वृन्दावन ऐश्वर्य और माधुर्य में सर्वोपरि है, परन्तु इसकी विशेषता और विलक्षणता यह है कि इसका ऐश्वर्य इसके माधुर्यसे पूर्णरूपसे आच्छादित है, इसलिए इ...
सत् - चित् - आनन्द ! कई रसिक समाज के मन्दिरों में वर्ष के 365 दिन में 370 से करीब 400 उत्सव तक मनाये जाते है ! व्यापक ईश्वर ही रूप-पररूप-विभिन्न रूप में सर्वत्र है ! सत्य ही ईश्वर और ईश्वर ह...
मेरे प्राणेश मनमोहन तुम्हे ढूँढू कहा जाकर बड़ा बेचैन हु तुम बिन जरा देखो मुझे आकर ना भूलूंगा कभी उपकार अपने उस हितैषी का जो करवादे मुझे दर्शन कह्नैया को यहाँ लाकर ओ मेरे प्...
कुब्जा सुंदरी का प्रेम कुब्जा कंस की दासी थी जो कि प्रतिदिन कंस के लिए सुगंधित चंदन लेप ले जाती थी । भगवान ने कुब्जा को सुंदरी कह कर पुकारा क्योंकि ब्रजवासियों को चंदन की ज...